Tuesday, 15 May 2012
Pankaj Joshi ▶ Yuva Brahmin Munch
हैँ नई चेतना नये सुरे का ये मंच ।
बचा हुआ है अभी यहाँ भी धर्म ।।
यहाँ होती हैँ एक अद्भूत ज्ञान की अनुभुती ।
सच्चाई की बयान करता हैँ येमंच कहती ये जंमी ।
सभी करते है यहाँ रोज-रोज नये कंमन्ट ।
वाह क्या खूब बनायाइस मंच के तुने मेरे खुदा ।
अब इन प्यारी यादो के न मुझसे जुदा ।
इस मंच ने बना ली हैअपनी अलग पहचान ।
तभी तो जन-जन ने लिया हैँ इसे जान ।
क्या कहू अब पाण्डेजी आपसे।
लिख रहा हू सत्य की राह से ।
मेरी दुवा है इस मंच के ये बडता रहे ।
सत्य की राह पर चलता रहे ।
गम नही हम रहे या न रहेँ ।
आप और ये मंच हो ।
क्या लिखू लिखने केलिए शब्द्र नही ।
यहाँ झूठ असत्य की कोइ जरूरत नही ।
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