Friday, 13 July 2012

Abhishek Bajpai ▶ Yuva Brahmin Munch,Uttar Pradesh जय परसुराम मित्रो, अजमाइये न हमको,हम शेरेदिल जवाँ है। मरने न आ पतिँगे,जलती हुई समाँ है।। रणभेरियाँ बजी तो भडकेँगे बन के शोले समझो हमेँ ही बिजली समझो हमीँ तूफाँ है।। ना शेर को जगाओ न नजर ही मिलाओ। जायेँगे चट रे झट मे,तरुणिम अभी वयां है।। टाँग ना अडाओ न नजर ही गडाओ। उडा उसे रे देँगे हम आँधी औ तूफाँ है। चलते है जब समर मेँ क्रपाण ले कमर मेँ। हम वीर है जवाँ है ।। हम पुंज ज्ञान दीपक मन का निकुँज है हम। है कर्म के पुजारी,गीताकी हम जुवाँ है।। आओ न हमसे लडने यूँ व्यर्थ ही रे मरने। आया अगर शरण मेँ,फिर तो हमी क्षमा है।। 13.07.2012, at 2:25pm ·

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