Friday, 13 July 2012

Abhishek Bajpai ▶ Yuva Brahmin Munch,Uttar Pradesh जय परसुराम मित्रो, अजमाइये न हमको,हम शेरेदिल जवाँ है। मरने न आ पतिँगे,जलती हुई समाँ है।। रणभेरियाँ बजी तो भडकेँगे बन के शोले समझो हमेँ ही बिजली समझो हमीँ तूफाँ है।। ना शेर को जगाओ न नजर ही मिलाओ। जायेँगे चट रे झट मे,तरुणिम अभी वयां है।। टाँग ना अडाओ न नजर ही गडाओ। उडा उसे रे देँगे हम आँधी औ तूफाँ है। चलते है जब समर मेँ क्रपाण ले कमर मेँ। हम वीर है जवाँ है ।। हम पुंज ज्ञान दीपक मन का निकुँज है हम। है कर्म के पुजारी,गीताकी हम जुवाँ है।। आओ न हमसे लडने यूँ व्यर्थ ही रे मरने। आया अगर शरण मेँ,फिर तो हमी क्षमा है।। 13.07.2012, at 2:25pm ·

Friday, 18 May 2012

QUOTES

हम चलते रहे और कारवां बनता गया, कुछ थक गये और साथ छोड़ गये, कुछ ने हमें सराहा और जुड़ते गये, जिन्होंने छोड़ा, वो भी अपने ही थे, जो साथ चले, वो भी अपने ही हैं, फर्क सिर्फ इतना मात्र है कि, जो साथ नहीं, वो अनभिज्ञ हैं| हर हालमें खुश रहनेकी विद्या सत्संगसे ही मिलती है | Under all circumstances, one learns the art of happiness only through Satsanga.

Wednesday, 16 May 2012

Neeti Nirdharan

सदस्यों के लिए"युवा ब्रह्मण मंच''की नीति निर्धारण :|| आप सभी गणमान्य सद स्यों का य हाँ इस सभा में स्वाग त है| हम सभी मिलकर यहाँ से एक स्वस्थ समाज का निर्माण किया जाय| जहां कोइ विद्वेष न हो | सिर्फ जनसामान्य की बात हो, जिससे वह रोज संघर्ष करता है| समाज को तरक्की चाहिए | मूलभूत सुविधाओं क ा स्पर्श चाहिए | भूख के दानव और भ्रष्टाचार से निजात चाहिए | भय से छुटकारा चाहिए | हम सभी मिलकर इसपर कदमदर कदम संघर्ष करे | राह आसान नही , पर मंजिल दूर नही| यह "युवा ब्रह्मण मंच " हम सभी का है किसी एक विशेष व्यक्ति अथवा दल कानहीं है, अतः निः संकोच अपने विचार रखें| वह सारे विषय यहाँ लाये जा सकते है जिससे ब्राह्मण हित प्रभावित ह ो | सभी समाज हमारी तरफदेख रहा है | क्या हमअगुवाई कर पाने मेंसक्षम हो सकेंगे ? यहाँ कोई किसी से आहत न हो इस लिए एक नीति निर्धारण आवश्यक है , जिसका सभी के द्वारा सदै वध्यान रखा जाय| सदस्यों के लिए " युवा ब्रह्मण मंच '' की नीति निर्धारण : 1 - अमर्यादित भाषा का प्रयोग पूर्णतया वर्जित है | 2 - मानव संसाधन से जुड़े विषय यहाँ की प्राथमिकता है | 3 - धर्म, संस् कृति,संस्क ृत, हिन्दी , अन्य भारतीय भाषा के विकास के लिए सारे तथ्य सादर आमंत्रित है| 4 - आप अपने व्यवसाय,ग्रुप,कंप नी के प्रचार हेतु पोस्ट कर सकते हैं | 5 - फूहड़ पोस्ट, अश् लील चित्र, चुटकुले, कमेन्ट करना सख्त माना है | ऐसी पोस्ट करने वाले सदस्य को निष्काषित कर दिया जाएगा | 6 - कोई आहत ना हो इसका विशेस दयां रखा जाय| 7 - किसी भी प्रकार का सुझाव , किसी सदस्य / पोस्ट से शिकायत हो तो प्रशासक को ईमेल /मेसेज करें 8- यदि यह सभा आपके मन मुताबिक़ नहीं हैतो आप 'लीव ग्रुप' आप्शन का प्रयोग करें, मंच पर अनावश्यक हंगामा ना करें . 9- इस मंच पर मर्यादों की परिधि में ही पोस्ट डाले यहाँ | ....युवा ब्रह्मण मंच.....

Tuesday, 15 May 2012

Pankaj Joshi ▶ Yuva Brahmin Munch

हैँ नई चेतना नये सुरे का ये मंच । बचा हुआ है अभी यहाँ भी धर्म ।। यहाँ होती हैँ एक अद्भूत ज्ञान की अनुभुती । सच्चाई की बयान करता हैँ येमंच कहती ये जंमी । सभी करते है यहाँ रोज-रोज नये कंमन्ट । वाह क्या खूब बनायाइस मंच के तुने मेरे खुदा । अब इन प्यारी यादो के न मुझसे जुदा । इस मंच ने बना ली हैअपनी अलग पहचान । तभी तो जन-जन ने लिया हैँ इसे जान । क्या कहू अब पाण्डेजी आपसे। लिख रहा हू सत्य की राह से । मेरी दुवा है इस मंच के ये बडता रहे । सत्य की राह पर चलता रहे । गम नही हम रहे या न रहेँ । आप और ये मंच हो । क्या लिखू लिखने केलिए शब्द्र नही । यहाँ झूठ असत्य की कोइ जरूरत नही ।

Monday, 16 April 2012

"Munch's Meeting Invitation"

Bade garv evam harsh ke sath suchit evam aamantrit karna chahte hain ki 'Yuva Brahmin Munch' matra FB tak simit nahi rahega,iska registration kary sampann hone ke bad hum jamini star par samajik kary karna prarambh kar denge.
nivedan hai aap bhi is kary me sahyog de,humare munch ke sath jude. aapke sahyog ke prati hum aap samast sajjano ke sadaiv aabhari rahenge.
»Munch ke vishesh meeting me aap samast log sadar aamantrit hain-
(1)- 21-24 Aprail, Hanuman garhi,Ayodhya,F aizabad.
(2)- 24-28 Aprail, Lacknow.
(3)- 28 Aprail-05 May, Allahabad.
-Nivedan hai aap log apna amulya samay nikalkar is meeting me bhagle aur ise safal banaye.
Sampark sutra:
Mr. Ajay Mishra- 9552235577
Ram Krishna Pandey-99840345 81
Mr. Amit Dwivedi- 9039291217

Email:
rkpandey@representative.com

Blogsite:
http://viswabrahminsabha.blogspot.com/
" YUVA BRAHMIN MUNCH "

Sunday, 4 March 2012

अथे जुगुलिं ब्राह्मणयागु


अथे जुगुलिं ब्राह्मणयागु
कल भी राजनीती का बड़ा आधार ब्राह्मण था आज भी है, परन्तु कल इसका सदुपयोग समाज के बौद्धिक विकास में किया जाता रहा आज इसका प्रयोग बौद्धिक भ्रष्टाचार में किया जा रहा है..! आवश्यकता है इस अंतर को समझकर राष्ट्र निर्माण, समाज का पुनरोत्थान की कोशिस में लगना. हमें किसी राजनितिक दल से निकटता नहीं बनानी. धर्म और राजनीती के विशेष अंतर में रहकर अपने ब्राह्मण को पुनर्जाग्रत करना !

Friday, 30 December 2011

"ब्राहमण समाज "

ब्राहमण समाज
कल मेरे एक ज्येष्ठ भ्राता ने, कहा लिखो तुम कविता,
जिसमे हो ब्राहमण समाज, जिसमे हो पूर्ण पवित्रता,
चलो शुरू करते है कविता की रचना, आप जिसे समझे वास्तव में वाही तो है अपना,
राम कृष्ण की धरती पर कितने समाज है बने हुए,
कितने अल्लाह कितने जीसस है यहाँ हुए,
पर ध्यान से देखा जाय तो है हम एक ईश के बेटे,
ये पृथ्वी भी तो हर जन को है एक सूत्र में समेटे,
पृथ्वी तो भी है एक समाज, जो इतने लोगो को है समा लिया
हमने भी तो है एक समाज, को फसबूक पर बना लिया,
प्राचीन काल से ब्राह्मन सबका अस्तित्व आया है बचाता
कल मेरे एक ज्येष्ठ भ्राता ने, कहा लिखो तुम कविता,
जिसमे हो ब्राहमण समाज, जिसमे हो पूर्ण पवित्रता,...............
कर्मो के आधार पर हमने, सबको अलग अलग है बांटा,
ब्राह्मन, क्षत्रिय, वैश्य और सूद्र, इन सबका है एक ही दाता,
इस्वर ने भी ब्राह्मन को समझा है जनश्रेष्ठ की श्रेणी में,
आप भी समझे आप भी जाने, उसके इस महान जीवन को,
सही शिक्षा तो वही है देता, तो क्यों चाहें और किसी को,
भगवन तक पहुचाने का मार्ग उसी ने दिखलाया,
तो फिर क्यों तुम दूर जा रहे, छोड़ के इस ब्राह्मन समाज को ,
जय श्रीराम, हो या जय श्रीकृष्णा, ली शिक्षा और दिए उपदेश,
वो भी तो भगवान ही थे ना, जिनका स्वयं तो ब्राह्मन भी था और था ये उनका ही तो देश,
वे देना चाहते थे सन्देश इन जन जन और जीवन को,
की कैसे बचाया ब्राह्मन ने इस अखिल विश्व और मानवता को,
दुनिया के इस मनुष्य मात्र को, वही तो असली जन्म दिलाता,
कल मेरे एक ज्येष्ठ भ्राता ने, कहा लिखो तुम कविता,
जिसमे हो ब्राहमण समाज, जिसमे हो पूर्ण पवित्रता,...............
भगवन जी की परीक्षा को, हनुमत जी ही बने थे ब्राह्मन,
अंतर मन से जान लिया, इस बन में है कौन ये ब्राह्मन,
और मै क्या क्या सुनाऊ समाज को, कितनी महत्ता है इस जाति की,
जो सब पापो से मुक्त कराता, वही तो भगवन के दर्शन कराता,
चलो साथ हम एक एक करके, इस समाज को यह बतलाये,
श्रेष्ठ तो वैसे सभी समाज है,, ब्राह्मन समाज अति श्रेष्ठ कहलाये,
बोलो हम सब एक ही स्वर में, एक हमारा है उद्देश्य,
नहीं कोई है दूर ओ बंधू, अब बन गयी है समाज की एक साईट,
चाहे हो अब देश हमारा, या हो पूरा विश्व विदेश,
गर तुमको हो कोई समस्या, या हो कोई अलग कहानी,
आ जाओ तुम ब्राह्मन बंधू , मिलेगी तुमको यहाँ से गाइड,
कोई तुम्हारे दिल की इच्छा, अब तो रह गयी हो बाकी,
ठीक मेरी तरह भी तुम अपना, कविता या कहानी और या सबद या साखी,
हा, एक बात मेरी तुम ध्यान रखो की, प्रयोग हो मर्यादित भाषा,
येही रहेगी तुम सबसे और यही रहेगी हर लोगो से,
और यही साईट की है अभिलाषा,
धन्य हुआ मै मै कविता लिखकर, नहीं तो बस मै हु एक जड़ता,
श्रेष्ठ जनों काशिष है मुझपर, जो लिख पाता हु ये सब कविता,
कल मेरे एक ज्येष्ठ भ्राता ने, कहा लिखो तुम कविता,
जिसमे हो ब्राहमण समाज, जिसमे हो पूर्ण पवित्रता,...............

धन्यवाद
मित्रो और फस्बूक समूह जन

क्षमा : यदि इस कविता की पक्ति में कोई भी त्रुटी पूर्ण वाक्य या कोई वाक्य अधुरा हो तो मै सहृदय क्षमा प्रार्थ हु, और आपके सुझाव सादर निवेदन है !

 
(रचना : संजय पाण्डेय )