" वसुधैव कुटुम्बकम "
Thursday, 1 December 2011
राधा-राधा
तू भी राधा मैं भी राधा -जग में भी पाया राधा-राधा ;
तेरी मोहनी मूरत को ;हर रोज पुकारू राधा-राधा ;
कोई कहे राधा है श्याम;कोई श्याम को कहता राधा ,
नयना जब बंद किये अपने ;हर जीव में पाया राधा-राधा !!!(विवेक मिश्र )
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