Wednesday, 28 December 2011

" भजन "(Presented by: Ram Krishna Pandey)

(सुख के धाम कृष्ण और राम )

अंत भला तो जग भला, भला राम का नाम,
तीनो काल है इनके वश में, जो हर सुख के धाम,
है सुख के धाम कृष्ण और राम........
तेरे बस में कुछ भी नहीं है, क्यों इतना इतराता है,
उपदेश दिया जिसने गीता में , क्यों उसको भूल तू जाता है,
हर पक्ति उसकी है सुखदायी, जीवन में न होगे दुखदायी,.
आरुण हुआ जब गीता पथ पर, ध्यान किया जब तुने उनका,
नारायण वे ॐ हो प्रभु जी, दूर करेंगे दुःख का कानन,
भूतकाल कल में जीना छोड़ो, आ जाओ वर्तमान में
अगर ज्ञान न हुआ हो तुमको, लो तुम ज्ञान कार्यक्रम शक्तिमान में,
शक्तिमान से आशय मेरा बस इतना है, जो ज्ञान दिया उसने है सबको वो क्या इतना कम है,
आगे मै अब क्या लिखता, अब समझ में मुझको नहीं आता
समझदार है आप लोग भी, मै तो जीवन से ही जड़ता,
कोशिश करता हु की मै भी, बन जाऊ एक अच्छा आदमी,
क्या मेरी ये टूटी कविता, लगती है आपको भी प्यारी,
बस आशीर्वाद आपका हो, तो हो जाऊ मै भी कुछ प्यारा,
नहीं तो बस लिखता ही रहूँगा, कविताए न्यारी न्यारी,
अपने अन्दर रखता हु , कुछ अच्छा करने की हरदम,
बस साथ रहे न दूर रहे, तो दूर रहे ये भारी गम,
करता हु मै लिखना बंद, याद करो तुम उसका नाम
अंत भला तो जग भला, भला राम का नाम,
तीनो काल है इनके वश में, जो हर सुख के धाम,
है सुख के धाम कृष्ण और राम........
उसके आगे तुक्ष हु मै, जो जगपावन है नाम सुहावन,
वो है मेरे पुरुषोतम राम !


(बोलो जय श्रीराम, श्री गणेशाय नमः, जय हनुमान, जय माँ दुर्गा, जय श्री हरी विष्णु, आदि देवताओ की जय, )
रचना-संजय पाण्डेय 

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