ब्राह्मण के हर पग पग से कम्पित होती हे यह धारा.
नभ मंडल पुष्प वृष्टि से गाता हे उसकी ही महिमा,
परशुराम के वंशज हे हम क्षत्रिय हमारी ताकत हे,
वैश्यों के ही सामर्थ्य से वैभव ब्राह्मण का बालक हे,
विश्व गुरु हम विश्व पुरुष हे विष्णु को भी ज़ुकाते हे,
निर्णय कर ले एक बार जो रूद्र को भी कंपाते हे,
शिव रूद्र का सामर्थ्य हे हम में नहीं किसी से डरते हे
ऋषि मुनि यह पुनीत धरा में देखो ज्ञान का सिंचन करते हे,
आर्य हे हम यह धारा के विश्व में सब से श्रेष्ठ हे.
"कृण्वन्तो विश्वं आर्यम" गर्जनाद हम करते हे.
सनातन वैदिक धर्म हे हमारा मनु ऋषि की संताने हे,
आँख उठाकर देखना भी मत तांडव मृत्यु का कर देंगे.
माँ संस्कृति की आँख में आंसू अब नहीं सहे जायेंगे
राम और कृष्ण को लेकर विजय डंका बजायेंगे.
नत नत मस्तक हे माँ भारती तव गुण गान हम गाते हे
अखंड आर्यावर्त हमारी कल्पना साकारित कर दिखलायेंगे.
श्री राम चंद्र-हनुमान की आज शपथ हम खाते हे.
समूचे विश्व में "हर हर महादेव" यही नाद गुन्जायेंगे.
वेदांत केसरी जब तक गरजा नहीं हे गरजे तब तक सियाले हे.
वेद-उपनिषद के गर्जनाद से मौन सारे धर्म हे.
यहाँ देखो गायत्री मंत्र आज भी उर्जा जगाता हे
रामायण-महाभारत आदि मानव गौरव जगाता हे.
मनु स्मृति हे संविधान विश्व का महिमा उसकी जगाएंगे.
"जय श्री राम" का गर्जनाद हर घर में हम फेलायेंगे,
अयोध्या हे हमारी भूमि जहा श्री राम चंद्र जी नाचे थे
बाबर हों या बाबरी चाहे हुकूमत राम की दिखायेंगे.
बौद्धादी धर्म का पाखण्ड जब आचार्य शंकर तोडते हे
कुमारिल भट्ट मंडन मिश्र जागृत हों माँ भारती के अश्रु पोछते हे.
चाणक्य की वह गरिमा देखो राष्ट्र प्रेम जगाती हे.
भगत सिंह की प्रतिमा आज भी युवा को दिशा दे जाती हे.
क्यों हों मौन हे आर्य वंशजो जागो माँ संस्कृति पुकारती हे
विवेकानंद के बालको दिखलादो श्रेष्ठ विश्व में हम ही हे.
हिंदू-भगवा व्याप्त करेंगे आर्यावर्त में संकल्प हमारा हे
रहीम भी अब राम बनेंगे हर हर महादेव उद्गार करेन्गे.
यही संकल्प हर हिंदू का हों यही निर्देश माँ भारती का हे.
नमः पार्वती पते हर हर महादेव.
- समर्पण त्रिवेदी वेदान्ताचार्य
नभ मंडल पुष्प वृष्टि से गाता हे उसकी ही महिमा,
परशुराम के वंशज हे हम क्षत्रिय हमारी ताकत हे,
वैश्यों के ही सामर्थ्य से वैभव ब्राह्मण का बालक हे,
विश्व गुरु हम विश्व पुरुष हे विष्णु को भी ज़ुकाते हे,
निर्णय कर ले एक बार जो रूद्र को भी कंपाते हे,
शिव रूद्र का सामर्थ्य हे हम में नहीं किसी से डरते हे
ऋषि मुनि यह पुनीत धरा में देखो ज्ञान का सिंचन करते हे,
आर्य हे हम यह धारा के विश्व में सब से श्रेष्ठ हे.
"कृण्वन्तो विश्वं आर्यम" गर्जनाद हम करते हे.
सनातन वैदिक धर्म हे हमारा मनु ऋषि की संताने हे,
आँख उठाकर देखना भी मत तांडव मृत्यु का कर देंगे.
माँ संस्कृति की आँख में आंसू अब नहीं सहे जायेंगे
राम और कृष्ण को लेकर विजय डंका बजायेंगे.
नत नत मस्तक हे माँ भारती तव गुण गान हम गाते हे
अखंड आर्यावर्त हमारी कल्पना साकारित कर दिखलायेंगे.
श्री राम चंद्र-हनुमान की आज शपथ हम खाते हे.
समूचे विश्व में "हर हर महादेव" यही नाद गुन्जायेंगे.
वेदांत केसरी जब तक गरजा नहीं हे गरजे तब तक सियाले हे.
वेद-उपनिषद के गर्जनाद से मौन सारे धर्म हे.
यहाँ देखो गायत्री मंत्र आज भी उर्जा जगाता हे
रामायण-महाभारत आदि मानव गौरव जगाता हे.
मनु स्मृति हे संविधान विश्व का महिमा उसकी जगाएंगे.
"जय श्री राम" का गर्जनाद हर घर में हम फेलायेंगे,
अयोध्या हे हमारी भूमि जहा श्री राम चंद्र जी नाचे थे
बाबर हों या बाबरी चाहे हुकूमत राम की दिखायेंगे.
बौद्धादी धर्म का पाखण्ड जब आचार्य शंकर तोडते हे
कुमारिल भट्ट मंडन मिश्र जागृत हों माँ भारती के अश्रु पोछते हे.
चाणक्य की वह गरिमा देखो राष्ट्र प्रेम जगाती हे.
भगत सिंह की प्रतिमा आज भी युवा को दिशा दे जाती हे.
क्यों हों मौन हे आर्य वंशजो जागो माँ संस्कृति पुकारती हे
विवेकानंद के बालको दिखलादो श्रेष्ठ विश्व में हम ही हे.
हिंदू-भगवा व्याप्त करेंगे आर्यावर्त में संकल्प हमारा हे
रहीम भी अब राम बनेंगे हर हर महादेव उद्गार करेन्गे.
यही संकल्प हर हिंदू का हों यही निर्देश माँ भारती का हे.
नमः पार्वती पते हर हर महादेव.
- समर्पण त्रिवेदी वेदान्ताचार्य

काशी विश्वनाथ बाबा की जय. "कृण्वन्तो विश्वं आर्यम" और "हर हर महादेव" का गर्जनाद करती इसकी पहली प्रस्तुति ही इतनी प्रेरणादायक होगी, ऐसी आशा नहीं थी. आशा के पार की उपलब्धि अति सुखकारी होती है. में इसी सुख का अनुभव कर रहा हूँ. इसके जन्मदाता श्री राम कृष्ण पाण्डेय तथा विवेक जी को ह्रदय से बधाई.
ReplyDeleteमैं ,तू,यह,वह,मेरा,तेरा,यह सब भेद असत है |
ReplyDeleteशाश्वत ,अच्युत एक निरामय आत्मा केवल सत् है ||
ब्राह्मण के हर पग पग से कम्पित होती हे यह धरा.....सुपर लाइक.
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